कला, संस्कृति के साथ समृद्धि के द्वार खोलने के साथ मध्यप्रदेश की वैश्विक साख स्थापित करेगा IIFA: कमल नाथ
हिंदी सिनेमा की इंद्रधनुषी दुनिया को हिंदुस्तान की कला, संस्कृति, संस्कारों और साहित्य का प्रतिबिंब माना जाता है। फिल्म जगत की हस्तियों ने एक बार ये मानस बनाया कि भारत के गौरवशाली इतिहास और सुनहरे भविष्य को हर हाल में विश्वभर में रेखांकित किया जाना चाहिए, ताकि भारत की साख को दुनिया में स्थापित किया जा सके और ये महती जिम्मेदारी IIFA को सौंपी गई। नई सदी 2000 में अवार्ड की बुनियाद यूनाइटेड किंगडम के लंदन शहर में रखी गई। आयोजन इतना सफल रहा कि पूरे ब्रिटेन ने एक स्वर में भारत को कहा ‘हम दिल दे चुके सनम’ और यही वह पहली फिल्म भी थी जिसे सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मिला। लंदन IIFA सफलता की अनुगूँज से कई देशों ने IIFA आयोजन के लिए अपनी अभिरुचि जाहिर की। दूसरा अवार्ड फंक्शन अफ्रीका के सनसिटी में आयोजित किया गया। फिर मलेशिया, सिंगापुर, नीदरलैंड, दुबई, थाईलैंड, मकाऊ, श्रीलंका, यूएस, स्पेन, थाईलैंड, अर्थात् देश दर देश भारत की ख्याति विश्वभर में फैलती गई। IIFA का सामाजिक सरोकार ब्रिटेन के यार्कशायर में रह रहे साउथ एशियन समुदाय के सामाजिक और सांस्कृतिक सरोकारों के दृष्टिगत ब्रिटेन की सरका...